“मोर करम मोर धरम” एक सामाजिक-धार्मिक छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जिसकी कहानी कर्म, धर्म और नैतिक मूल्यों पर आधारित है। फिल्म एक सच्चे, मेहनती और ईमानदार युवक की जीवन-यात्रा को दिखाती है, जो मानता है कि इंसान का कर्म ही उसका असली धर्म होता है। समाज में फैले अन्याय, भेदभाव और स्वार्थ के बीच वह अपने सिद्धांतों से समझौता किए बिना सही रास्ते पर चलता है, भले ही उसे व्यक्तिगत नुकसान और संघर्षों का सामना करना पड़े। पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक दबावों और भावनात्मक मोड़ों के साथ आगे बढ़ती कहानी यह संदेश देती है कि ईमानदारी, मेहनत और सही कर्म के बल पर ही इंसान सम्मान और सच्ची खुशी प्राप्त कर सकता है।