Kahi Debe Sandesh

Kahi Debe Sandesh

0/10 (2 Votes)

Released: 16 Apr 1965

Genres: Award-winning

Language: Chhattisgarhi

CBFC: U

Share this page

Kahi Debe Sandesh Plot:

कहानी छत्तीसगढ़ (तब मध्यप्रदेश) के एक गांव की है, जहाँ जातिवाद गहराई से फैला हुआ है। फ़िल्म की शुरुआत होती है जमींदार और पुरोहित (पंडित) की बातचीत से, जिसमें वे सतनामी समाज के चरणदास से ज़मीन वापस लेने की योजना बनाते हैं। जमींदार अपनी पत्नी दुलारी से भी इस बारे में चर्चा करता है। चरणदास की पत्नी फुलवती उसे समझाती है कि विवाद करने के बजाय बात को आपसी समझ से सुलझा लेना बेहतर है। वहीं पुरोहित गांव में सतनामी समाज के खिलाफ़ ऊँची जातियों में नफ़रत फैलाने की कोशिश करता है। लेकिन गांव के बच्चे इस जातिवाद पर सवाल उठाते हैं और स्कूल में इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं। कुछ सालों बाद, नयंदास (चरणदास का बेटा) कृषि विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करके गांव लौटता है। वह गांव के किसानों की मदद करने लगता है। वह अपनी बचपन की सहेलियों रूपा और गीता (जमींदार की बहनें) से दोबारा मिलता है। रूपा और नयंदास के बीच बचपन का लगाव अब प्रेम में बदल जाता है, लेकिन वे जानते हैं कि दोनों अलग जातियों से हैं। इस प्रेम को देखकर कमल नारायण पांडे को जलन होती है। वह अफवाह फैलाता है कि रूपा और गीता अब शादी के लायक नहीं रहीं। वह रूपा से जबरदस्ती शादी करना चाहता है, और पुरोहित से रिश्वत देकर शादी की बातचीत को टालता है। कमल बार-बार अफवाहें फैलाता है, जिससे रूपा इतने दुख में चली जाती है कि घर से बाहर निकलना बंद कर देती है। नयंदास गांव में एक कृषक सहकारी समिति (co-operative society) बनाने की कोशिश करता है। उसी समय उसका दोस्त डॉ. रविकांत तिवारी गांव में पोस्टिंग पाकर आ जाता है। कमल जब रूपा को फिर से जबरदस्ती शादी के लिए दबाता है और अफवाहें फैलाता है, तो रूपा, नयंदास, गीता और डॉ. रविकांत मिलकर समाज से लड़ने का फैसला करते हैं। रूपा और नयंदास मंदिर में शादी कर लेते हैं, और फिर अपने-अपने परिवार को समझा कर जातिवाद के खिलाफ़ एक नया संदेश देते हैं।

Cast

Reviews

Post a Review

Hemant Choudhary
10.0/10
Apr 14, 2025

Good

Admin User
10.0/10
Jul 03, 2025

अति सुघ्घर