छत्तीसगढ़ी मनोरंजन का इतिहास: लोक परंपराओं से छॉलीवुड के उदय तक
छत्तीसगढ़ी मनोरंजन प्राचीन आदिवासी लोक कलाओं से विकसित होकर एक आधुनिक फिल्म उद्योग तक पहुंचा है। राज्य की 42 जनजातीय समुदायों ने सदियों तक पंडवानी, तममा और सुषार जैसी प्रदर्शन कलाओं को संरक्षित रखा। 1965 में, मनु नायक ने पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म “कही देबे संदेश” रिलीज की, जो अंतरजातीय प्रेम पर आधारित थी और जिसमें मोहम्मद रफी के गीत शामिल थे। लगभग 30 वर्षों के सन्नाटे के बाद, वर्ष 2000 में सतीश जैन की ब्लॉकबस्टर फिल्म “मोर छैंहा भुइंया” (30 लाख रुपये बजट, 2 करोड़ रुपये की कमाई) के साथ इस उद्योग का पुनर्जन्म हुआ। यह फिल्म 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने से ठीक पहले रिलीज हुई थी। आज “छॉलीवुड” मया, तुरा रिक्शावाला और लैला टिप टॉप जैसी सुपरहिट फिल्में बना रहा है, जहां 20–30 लाख रुपये के बजट वाली फिल्में 1 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं।